अमेरिका और ईरान के बीच जारी 'कोल्ड वॉर' एक बार फिर भीषण टकराव की कगार पर पहुँच गया है। आज 1 मई 2026 को व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने नए परमाणु समझौते की शर्तों को नहीं माना, तो उसे "सर्वनाश" (Oblivion) का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप के इस आक्रामक तेवर ने उस युद्ध विराम (Ceasefire) को खतरे में डाल दिया है जो अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ था।
खामेनेई का कड़ा पलटवार: "समुद्र की गहराइयों में डूबेगा अमेरिका"
ट्रंप की धमकी के जवाब में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक कड़ा आधिकारिक पत्र जारी किया है। उन्होंने अमेरिका की 'दादागिरी' को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "अमेरिकी युद्धपोतों के लिए पर्सियन गल्फ में केवल एक ही जगह है—और वह है समुद्र की गहराई।" मोजतबा ने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत खत्म नहीं की गई, तो ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं का इस्तेमाल कर अमेरिकी नौसेना को 'तबाही' का स्वाद चखाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।
युद्ध समाप्ति की घोषणा के पीछे का कानूनी दांव
हैरानी की बात यह है कि एक ओर ट्रंप "तबाही" की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने घोषणा की है कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई जंग आधिकारिक तौर पर "समाप्त" हो गई है। जानकारों के अनुसार, यह ट्रंप का एक कानूनी दांव है। वॉर पॉवर रिज़ॉल्यूशन के तहत राष्ट्रपति को 60 दिनों के भीतर संसद (Congress) से युद्ध की मंजूरी लेनी अनिवार्य होती है, जिसकी समय-सीमा आज खत्म हो रही थी। "युद्ध समाप्त" बताकर ट्रंप ने संसद की मंजूरी की जरूरत को तकनीकी रूप से टाल दिया है, लेकिन साथ ही यह आदेश भी दिया है कि ईरान द्वारा किसी भी उकसावे पर अमेरिकी सेना बिना अनुमति के 'रक्षात्मक' हमला कर सकेगी।
वर्तमान में, होर्मुज स्ट्रेट पर 'दोहरी नाकेबंदी' की स्थिति है—ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार रोक रखा है, तो अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को पूरी तरह घेर लिया है।