तेहरान: साल 2026 की शुरुआत ईरान के लिए अशांति और हिंसा की नई लहर लेकर आई है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। तेहरान समेत ईरान के करीब 21 राज्यों में विद्रोह की आग फैल चुकी है। हजारों छात्र और आम नागरिक सड़कों पर उतरकर "तानाशाह मुर्दाबाद" और "डेथ टू डिक्टेटर" जैसे नारों के साथ मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों में अब तक कई लोगों की जान जाने की खबर है।
आर्थिक पतन और रिकॉर्ड तोड़ महंगाई
ईरान में इस विद्रोह की मुख्य जड़ वहां की चरमराती अर्थव्यवस्था है। दिसंबर 2025 तक ईरान में महंगाई की दर 42.5 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में 70% से अधिक का उछाल आया है। पश्चिमी प्रतिबंधों और 'स्नैपबैक' मैकेनिज्म के तहत लगे नए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों ने ईरानी मुद्रा 'रियाल' को इतिहास के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है। साल 2025 में रियाल ने डॉलर के मुकाबले अपनी आधी कीमत खो दी, जिससे आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
सैन्य हमलों और परमाणु संकट का असर
आर्थिक संकट के अलावा, जून 2025 में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों (विशेषकर फोर्डो और नतांज़) पर किए गए हवाई हमलों ने भी देश के भीतर अस्थिरता पैदा की है। इन हमलों में ईरान के कई सैन्य नेतृत्व और वैज्ञानिकों के मारे जाने की खबरें आई थीं, जिससे शासन की कमजोरी दुनिया के सामने आ गई। अब जनता का मानना है कि सरकार बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देने के बजाय परमाणु और सैन्य विस्तार में पैसा बर्बाद कर रही है।
हिंसक झड़पें और सरकार की कोशिशें
विद्रोह की आग तेहरान विश्वविद्यालय से शुरू होकर पश्चिमी शहरों जैसे लोरदेगन, कुहदश्त और इस्फहान तक पहुंच गई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और 'बासिज' मिलिशिया को प्रदर्शनों को कुचलने के लिए तैनात किया गया है। लोरदेगन में हुई झड़प में दो नागरिकों और कुहदश्त में एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई है। सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने शांति की अपील करते हुए कहा है कि सरकार "संवाद के लिए तैयार है," लेकिन प्रदर्शनकारी अब आर्थिक सुधारों के साथ-साथ पूरी राजनीतिक प्रणाली में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
शाह के वंशजों का बढ़ता प्रभाव
दिलचस्प बात यह है कि इस बार के प्रदर्शनों में 1979 की क्रांति से पहले के राजशाही शासन के प्रति सहानुभूति देखी जा रही है। कई शहरों में प्रदर्शनकारी अपदस्थ शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। लोग खुलकर इस्लामी शासन के खात्मे और 'ईरानी गणतंत्र' की बहाली की मांग कर रहे हैं, जो खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।