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जोमैटो-ब्लिंकिट ने बनाया रिकॉर्ड, 31 दिसंबर के दिन डिलिवर किए 75 लाख ऑर्डर

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Posted On:Friday, January 2, 2026

नए साल 2026 का स्वागत भारतीयों ने जमकर खा-पीकर और खरीदारी करके किया है। इसका सीधा प्रमाण ज़ोमैटो (Zomato) और उसकी क्विक कॉमर्स इकाई ब्लिंकिट (Blinkit) के आंकड़ों में देखने को मिला। बुधवार, 31 दिसंबर की रात इन दोनों प्लेटफॉर्म्स ने मिलकर कुल 75 लाख ऑर्डर डिलीवर किए, जो अब तक का एक नया कीर्तिमान है।

हड़ताल की अपीलों के बावजूद 'सुपर संडे' जैसा प्रदर्शन

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और लेबर यूनियंस द्वारा 31 दिसंबर को हड़ताल पर जाने की अपील की जा रही थी। हालांकि, ज़ोमैटो के फाउंडर दीपेंद्र गोयल ने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि इस हड़ताल का संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा।

  • रिकॉर्ड आंकड़े: दिन भर में 4.5 लाख से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी सेवाएं दीं।

  • ग्राहक संख्या: लगभग 63 लाख से अधिक ग्राहकों ने इन प्लेटफॉर्म्स से ऑर्डर किया।

  • सुरक्षा का साथ: गोयल ने बताया कि स्थानीय पुलिस के सहयोग से मुट्ठी भर उपद्रवियों को नियंत्रित किया गया, जिससे काम सुचारू रूप से चलता रहा।

डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई: क्या मिला एक्स्ट्रा?

दीपेंद्र गोयल ने उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि डिलीवरी पार्टनर्स को अतिरिक्त इंसेंटिव नहीं दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  1. नए साल जैसे विशेष मौकों पर हमेशा आम दिनों की तुलना में अधिक इंसेंटिव दिया जाता है।

  2. इस बार भी 31 दिसंबर को ज़ोमैटो अपने पार्टनर्स को प्रति ऑर्डर ₹120 से ₹150 तक का भुगतान कर रहा था।

  3. उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह सिस्टम 'अन्यायपूर्ण' होता, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से काम करने के लिए बाहर नहीं निकलते।

दूसरी तरफ: लेबर यूनियंस के दावे और मांगें

एक ओर जहां कंपनी रिकॉर्ड की बात कर रही है, वहीं इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) का दावा है कि देशभर में लगभग 2.10 लाख गिग वर्कर हड़ताल पर रहे। राइडर्स के एक वर्ग की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:

  • 10 मिनट डिलीवरी पर रोक: राइडर्स का कहना है कि क्विक डिलीवरी के दबाव में उनकी जान जोखिम में रहती है।

  • सोशल सिक्योरिटी: गिग वर्कर्स के लिए बेहतर स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसे लाभ।

  • स्थिर वेतन: प्रति ऑर्डर न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की मांग।

"रोजगार का इंजन है गिग इकोनॉमी"

विवादों के बीच दीपेंद्र गोयल ने गिग इकोनॉमी का बचाव करते हुए इसे भारत में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा इंजन बताया। उन्होंने कहा कि समय के साथ इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखेगा जब इन डिलीवरी पार्टनर्स के बच्चे बेहतर शिक्षा और स्थिर आय के दम पर देश की मुख्य वर्कफोर्स का हिस्सा बनेंगे।

निष्कर्ष: वॉर रूम बनाम यूनियन की जंग

31 दिसंबर को सुचारू रूप से चलाने के लिए कंपनियों ने बाकायदा 'वॉर रूम' स्थापित किए थे ताकि तकनीकी लोड और लॉजिस्टिक्स को संभाला जा सके। आंकड़ों को देखें तो कंपनियों ने यह जंग जीत ली है, लेकिन गिग वर्कर्स की सुरक्षा और वेतन को लेकर उठते सवाल भविष्य में इस सेक्टर के लिए चुनौती बने रहेंगे।


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