पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले, राज्य की विशेष जांच टीम (SIT) एक्शन मोड में आ गई है। शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में कड़ियां जोड़ने के लिए बंगाल पुलिस की एक टीम उत्तर प्रदेश पहुंची है।
यूपी कनेक्शन और कार की गुत्थी
एसआईटी की जांच में एक संदिग्ध वाहन की नंबर प्लेट के जरिए उत्तर प्रदेश के तार जुड़े होने का संकेत मिला है। सूत्रों के अनुसार, जिस कार का इस्तेमाल चंद्रनाथ रथ के वाहन को रोकने के लिए किया गया था, उसे हाल ही में एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए डाला गया था। जांच में पता चला है कि उत्तर प्रदेश से कुछ संदिग्धों ने इस विज्ञापन के संबंध में संपर्क किया था। पुलिस अब उन संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि हमलावरों तक पहुंचा जा सके।
सुपारी किलर्स और संगठित गिरोह का शक
पुलिस को अंदेशा है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पेशेवर 'सुपारी किलर्स' का सहारा लिया गया है। सात सदस्यीय एसआईटी टीम ने उत्तर प्रदेश में सक्रिय विभिन्न गिरोहों और अपराधियों के डोजियर की पड़ताल की है। शुरुआती जांच के अनुसार, इस साजिश में लगभग आठ लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें दो पेशेवर 'शार्प शूटर' होने का संदेह है। अन्य सदस्यों ने संभवतः हत्या के बाद फरार होने और कोलकाता में छिपने के ठिकानों की व्यवस्था की थी।
6 मई की वो खौफनाक वारदात
उल्लेखनीय है कि 6 मई को उत्तर 24 परगना जिले में अज्ञात हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में चंद्रनाथ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस ने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते नई सरकार के गठन से पहले ही पुलिस प्रशासन पर आरोपियों को पकड़ने का भारी दबाव है।